भानुप्रतापपुर कोरर क्षेत्र मे खाद उर्वरक दुकानों
भानुप्रतापपुर कोरर क्षेत्र मे खाद उर्वरक दुकानों
*भानुप्रतापपुर कोरर क्षेत्र में खाद-उर्वरक दुकानों पर छापा, 4 प्रतिष्ठानों को नोटिस 3 दिन में मांगा जवाब*
भानुप्रतापपुर। कोरर क्षेत्र में संचालित निजी कृषि सेवा केंद्रों और खाद-उर्वरक गोदामों पर कृषि विभाग की टीम ने आकस्मिक निरीक्षण कर बड़ी अनियमितताओं का खुलासा किया है। जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर चार प्रतिष्ठानों को उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत नोटिस जारी कर 3 दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण में यह सामने आया कि कई स्थानों पर उर्वरक विक्रय में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा था। विभाग ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को खाद-उर्वरक बेचने से पहले उसकी भूमि से संबंधित दस्तावेज, रकबा, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर का सत्यापन कर पीओएस मशीन एवं रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए, तभी विक्रय किया जाए।
पीओएस मशीन में गड़बड़ी बनी बड़ी चिंता
जांच के दौरान पीओएस मशीन के रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक में अंतर पाया गया, जिससे उर्वरक वितरण में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के अनुसार, कुछ मामलों में आधार कार्ड का दुरुपयोग कर अधिक मात्रा में उर्वरक चढ़ाने की आशंका भी सामने आई है, जिसकी सूची केंद्र स्तर से जांच के लिए प्राप्त हो रही है।
किसानों पर भी पड़ सकता है असर
अधिकारियों ने चेताया कि आगामी खरीफ सीजन में एग्रिस्टेक फार्मर आईडी के आधार से लिंक होने के कारण किसान के खसरा और रकबे का मिलान किया जाएगा। यदि किसी किसान के नाम पर वास्तविक खरीदी से अधिक उर्वरक दर्ज पाया गया, तो उसे सहकारी समितियों से मिलने वाली खाद में कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
इन प्रतिष्ठानों को जारी हुआ नोटिस
अनियमितता पाए जाने पर जिन कृषि केंद्रों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें
दुर्गा ट्रेडर्स कोरर, विजय ट्रेडर्स कोरर श्रद्धा कृषि केंद्र कोरर और जय वीरू कृषि केंद्र कोरर शामिल हैं।
- निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी महात्मा तरेत, खाद-उर्वरक एवं कीटनाशक निरीक्षक मनोज सरकार, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी किरण भंडारी, प्रवीण कवाची एवं शाखा प्रभारी भूपेंद्र गंगा सागर उपस्थित रहे।
कड़ी कार्रवाई के संकेत
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संबंधित प्रतिष्ठानों पर शासन स्तर से कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संचालकों की होगी।



