बस्तर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर पंडुम 2026 का भव्य शुभारंभ किया — आदिवासी संस्कृति की वैश्विक पहचान का मंच

 

जगदलपुर (बस्तर)।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज पारंपरिक गरिमा, सांस्कृतिक उल्लास और भव्य आयोजन के बीच बस्तर पंडुम 2026 का विधिवत शुभारंभ किया। यह ऐतिहासिक अवसर न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण रहा, क्योंकि देश की प्रथम नागरिक स्वयं आदिवासी संस्कृति के इस महाकुंभ में शामिल हुईं।

🔹 कड़े सुरक्षा प्रबंध, चाक-चौबंद व्यवस्था

राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।

  • पूरे जगदलपुर शहर को नो-फ्लाइंग ज़ोन घोषित किया गया है।
  • राष्ट्रपति के आगमन मार्ग पर बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है।
  • चप्पे-चप्पे पर सीआरपीएफ, जिला पुलिस और विशेष सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
  • ड्रोन और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

🔹 ट्रैफिक एडवाइजरी जारी

आम जनता की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग ने विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है।

  • कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई है।
  • वैकल्पिक रूट निर्धारित किए गए हैं।
  • आयोजन स्थल के आसपास पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है।
  • आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग लेन सुनिश्चित की गई है।

🔹 राष्ट्रपति का सांस्कृतिक अवलोकन

अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को नजदीक से देखेंगी।

  • वे पारंपरिक गोंडी नृत्य, धुरवा नृत्य और परंपरागत वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति का अवलोकन करेंगी।
  • स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प, शिल्पकला और चित्रकला प्रदर्शनी का निरीक्षण करेंगी।
  • आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और कलाकारों से संवाद भी करेंगी।

🔹 भव्य मंच और सांस्कृतिक सजावट

आयोजन स्थल पर अत्याधुनिक तकनीक और पारंपरिक सौंदर्यबोध के संगम से विशाल और भव्य मंच तैयार किया गया है।

  • मंच को आदिवासी कला, पारंपरिक प्रतीकों, भित्ति चित्रों और रंगीन आकृतियों से सजाया गया है।
  • लकड़ी की नक्काशी, मिट्टी की कलाकृतियाँ और बस्तर की विशिष्ट चित्रशैली को प्रदर्शित किया गया है।
  • पूरे परिसर को पारंपरिक आदिवासी रंगों — लाल, पीला, काला और सफेद — से संवारा गया है।
  • प्रवेश द्वार पर विशाल आदिवासी प्रतीकात्मक तोरण बनाए गए हैं।

🔹 बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रदर्शन

बस्तर पंडुम 2026 का उद्देश्य केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की गौरवशाली संस्कृति, विरासत और पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना है।

  • यह आयोजन आदिवासी कला, संगीत, नृत्य और जीवनशैली को नई पहचान देगा।
  • स्थानीय कलाकारों को बड़ा मंच मिलेगा।
  • पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
  • बस्तर की सकारात्मक छवि देश-दुनिया तक पहुँचेगी।

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