नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे या कराने जाएंगे? बिहार छोड़ा तो क्या होगा आगे*

दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय तीसरे नंबर की ताकत पर केंद्र की राजनीति करने वाले नीतीश कुमार ने जब बिहार की राजनीति में वापसी की तो राज्य को बदल डाला। अब, 20 साल बिहार को बदलने के बाद नीतीश कुमार खुद बदलने जा रहे हैं? कहा जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री उनके इस बदलाव पर मुहर लगाने के लिए पटना आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए नामांकन करते समय तक यह सस्पेंस चले तो आश्चर्य नहीं। बड़ा मामला है तो नीतीश कुमार बतौर मुख्यमंत्री भी नितिन के नामांकन में रहेंगे। लेकिन, क्या वह भी राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे? अगर करते हैं तो बिहार का क्या होगा और खुद नीतीश कुमार कहां पहुंच जाएंगे? यह सवाल होली की रात बिहार के लोगों के मन में भारत-न्यूजीलैंड टी20 वर्ल्ड कप फाइनल से ज्यादा तनाव देता रहा
एलान नहीं हुआ है। ऐसे में हर संभावना-आशंका को समझते हैं आगे।
अगर नीतीश ने अपना भी नामांकन किया तो क्या होगा?
कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार गुरुवार सुबह साढ़े 11 बजे राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने विधानसभा जाएंगे। विधानसभा की ओर से मीडिया को जारी एडवाइजरी और न्यौता है तो गृह मंत्री के हिसाब से, लेकिन उसने भी इस चर्चा को तेजी दे दी है। यह भी कहा जा रहा है कि 16 मार्च को नीतीश कुमार विधान परिषद् से इस्तीफा दे देंगे। लेकिन, अब भी सवाल कायम है कि देश की नरेंद्र मोदी सरकार को अपने सांसदों के बूते कायम रख रहे नीतीश कुमार क्या खुद एक राज्यसभा सांसद बनकर बिहार से कूच कर लेंगे? केंद्र की राजनीति में पीएम नरेंद्र मोदी के बाद गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बाद कहीं जगह हासिल करेंगे?*
एक मिनट के लिए मान लेते हैं कि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए राजी हो गए हैं और आज वह नामांकन कर लेंगे, तो फिर अगला सवाल आता है- बिहार का क्या होगा आगे? दूसरी तरफ, इससे राजद का एक पुराना आरोप भी पुष्ट हो जाएगा कि भाजपा ने नीतीश को निबटाने की तैयारी रखी है।*
बिहार में भाजपाई सीएम की प्रतीक्षा सूची में कई नाम
*बिहार की राजनीति से नीतीश कुमार का निकलना जदयू के लिए आत्मघाती होगा, यह तो पार्टी में नीतीश कुमार के सभी करीबी मानते हैं। अफसरशाही भी यह नहीं चाह रही कि नीतीश कहीं जाएं, क्योंकि किसी भी नए सीएम की स्थिति में अफसरशाही को सबसे ज्यादा असहजता होगी। भाजपा लंबे समय से सीएम बनाना चाह रही है और इसकी प्रतीक्षा सूची में कई नाम हैं। 2020 के चुनाव के समय नित्यानंद राय का नाम सबसे आगे था तो 2022-23 में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सम्राट चौधरी को भावी सीएम बना दिया था।*
नित्यानंद इस समय चुप हैं और सम्राट चुपचाप सब देख रहे हैं और यह कहना भी गलत नहीं होगा कि होली के दिन अचानक उठी इस चर्चा से वह खुश ही हो रहे होंगे। वैसे, अगर नीतीश कुमार निकल गए तो भाजपा चौंकाने वाला नाम भी दे सकती है, यह डर भी रहता ही है।
जदयू किसके भरोसे रहेगा आगे?* *नीतीश के जाने पर यह भी खतरा
*बिहार प्रदेश जदयू की कमान उमेश कुशवाहा के पास ही रहेगी, यह फैसला हो चुका है। वह निर्विरोध नामांकन करेंगे। लेकिन, राजनीतिक दलों ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी पता है कि जदयू का मतलब नीतीश कुमार हैं। कोई और नहीं। और, अगर नीतीश कुमार ने राज्यसभा के रास्ते केंद्र में वापसी की तो बिहार की राजनीति से वह गायब हो जाएंगे। केंद्र में उप प्रधानमंत्री बनकर भी वह बिहार के लिए कुछ नहीं कर सकेंगे और निश्चित तौर पर पार्टी के लिए तो नहीं ही। निशांत कुमार सीधे जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनेंगे और न बनना चाहेंगे और न ही वह आते ही नीतीश कुमार जैसा कद हासिल कर लेंगे।
ऐसे में जदयू को खत्म करने का बाकी पार्टियों का मिशन भी सफल हो जाए तो आश्चर्य नहीं। क्योंकि,जदयू में आरसीपी सिंह की वापसी का रास्ता रोक रखा गया है। राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह पहले से केंद्र की राजनीति में हैं और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी। संजय झा पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और राज्यसभा सांसद भी। दोनों अगड़ी जाति से हैं। ऐसे में लव-कुश समीकरण के आधार वाली पार्टी का ‘आधार’ यानी, नीतीश कुमार का खिसकना पार्टी के लिए अच्छा तो शायद ही हो।*


