“मुंबई की चकाचौंध छोड़ बस्तर की सेवा में लौटे—डॉ. विकास दीवान की प्रेरक यात्रा”
बस्तर चो गौरव

जगदलपुर की शांत और सांस्कृतिक धारा में पले-बढ़े डॉ. विकास दीवान आज बस्तर क्षेत्र में मुख–स्वास्थ्य जागरूकता का एक महत्वपूर्ण चेहरा बन चुके हैं। व्यापारिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे डॉ. दीवान की प्रारंभिक शिक्षा बारहवीं तक जगदलपुर में ही हुई, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र में आने की प्रेरणा उन्हें अपने नाना जी से मिली—जो स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ रहते हुए चिकित्सा के गहन ज्ञान के लिए जाने जाते थे।
मुंबई से बी.डी.एस और भिलाई से एम.डी.एस की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन भी पूरा किया। मसूढ़ों के रोगों—विशेषकर पायरिया—और दंत इंप्लांट के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता ने उन्हें एक भरोसेमंद दंत–विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया है।
शिक्षा का सफ़र भले ही सुचारु रहा, परंतु पीजी एडमिशन के दौरान उच्च न्यायालय द्वारा नीट परीक्षा निरस्त किए जाने की स्थिति ने एक बड़ा अवरोध खड़ा किया। लेकिन असली turning point तब आया जब कोरोना काल में परिवार में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ सामने आईं। इसी दौर में मुंबई की स्थापित प्रैक्टिस छोड़कर वापस अपनी मिट्टी—जगदलपुर—लौटने का कठिन लेकिन निर्णायक फैसला उन्होंने लिया। यही निर्णय आगे चलकर उनकी पहचान और सेवा–यात्रा की नई दिशा बना।
आज डॉ. विकास दीवान अपने क्लिनिक के माध्यम से न केवल इलाज कर रहे हैं, बल्कि मुख–स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने को अपना सबसे बड़ा दायित्व मानते हैं। इंडियन डेंटल एसोसिएशन, बस्तर ब्रांच के सचिव के रूप में वे लगातार ऐसे कार्यक्रम तैयार करते हैं जो बस्तर के आम जनमानस—विशेषकर वंचित वर्ग—तक सही जानकारी और उपचार पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उनका कहना है कि लोगों को शिक्षित करना, जागरूक करना और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप मुख–स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना ही उनके लिए गर्व का विषय है।
संवेदनशीलता, प्रतिबद्धता और बस्तर के प्रति गहरी आत्मीयता के साथ डॉ. विकास दीवान आज बस्तर में स्वास्थ्य–सेवा का एक विश्वसनीय स्तंभ बन चुके हैं—और उनकी यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


