देशराजस्थान

अरावली रोई तो धरती सूख जाएगी

पहाड़ बचेंगे तभी गांव–शहर बचेगा

 

कवर स्टोरी | मोर माटी

अरावली कोई साधारण पहाड़ नहीं है। यह वही दीवार है, जो सदियों से रेगिस्तान को रोककर खड़ी है, बारिश को रास्ता दिखाती है और धरती की कोख में पानी सहेजकर रखती है।
आज जब अरावली की पहचान ही बदली जा रही है, तब सवाल सीधा है—
अगर अरावली नहीं रही, तो गांव, खेत, जंगल और इंसान कैसे बचेंगे?


पहाड़ की परिभाषा बदली, संकट गहराया

नई परिभाषा में कहा गया है कि जमीन से 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ियां अब अरावली नहीं मानी जाएंगी।
इसका मतलब साफ है—
जो पहाड़ियां कल तक संरक्षित थीं, आज वे खनन, कटाई और कंक्रीट के हवाले कर दी जाएंगी।

जानकारों का कहना है कि इससे अरावली की अधिकतर पहाड़ियां कानून की पकड़ से बाहर हो जाएंगी। और फिर शुरू होगा—पत्थर तोड़ने, जंगल काटने और जमीन बेचने का खेल।


अरावली: गांव की ढाल, धरती की रीढ़

अरावली गुजरात से लेकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली है।
गांवों के कुएं, तालाब, नाले और खेत—सबका रिश्ता इसी पहाड़ से है।

बुजुर्ग कहते हैं—
“पहाड़ रहे तो पानी रहेगा, पानी रहा तो जीवन रहेगा।”


अगर अरावली टूटी, तो क्या होगा?

1. रेत खेतों पर चढ़ जाएगी

अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकती है।
अगर यह दीवार टूटी, तो रेत खेतों में घुसेगी।
खेती मुश्किल होगी, फसल घटेगी और गांव से शहर की मजबूरी भरी पलायन बढ़ेगा।

2. बारिश धोखा देने लगेगी

पहाड़ हवा और बादल को रोकते हैं, तभी समय पर बारिश होती है।
अरावली कमजोर हुई तो कभी बाढ़, कभी सूखा—
किसान हर साल आसमान की ओर देखकर डरता रहेगा।

3. कुएं–हैंडपंप सूख जाएंगे

अरावली की चट्टानें बारिश का पानी पकड़कर जमीन के भीतर भेजती हैं।
इसी से कुएं, नलकूप और तालाब भरते हैं।
पहाड़ कटे तो पानी नीचे जाएगा ही नहीं—प्यास स्थायी हो जाएगी।

4. हवा ज़हर बन जाएगी

पश्चिम से आने वाली धूल और आंधी को अरावली रोकती है।
इसके कमजोर होते ही शहरों की हवा और जहरीली होगी।
बच्चे, बूढ़े और मजदूर सबसे पहले बीमार पड़ेंगे।

5. जंगल उजड़े तो जीवन टूटेगा

अरावली के जंगलों में पेड़, पशु, पक्षी और कीट—सब एक-दूसरे से जुड़े हैं।
जंगल कटे तो यह पूरा रिश्ता टूट जाएगा।
फूड चेन बिगड़ेगी और नुकसान आखिर इंसान को ही होगा।


यह सिर्फ पहाड़ नहीं, भविष्य का सवाल है

अरावली को बचाना मतलब

  • किसान को बचाना
  • पानी को बचाना
  • हवा को बचाना
  • और आने वाली पीढ़ी को बचाना

अगर आज चुप रहे, तो कल पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा।


मोर माटी की बात

विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास जो धरती को ही बीमार कर दे—वह विकास नहीं, विनाश है।
अरावली बचेगी तभी मोर माटी बचेगी।


 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!