नक्सल संगठन का खुलासा: देशभर के 6 राज्यों में 320 नक्सली मारे गए — दक्षिण बस्तर में सर्वाधिक, बिहार-झारखंड–ओडिशा–तेलंगाना के कैडर भी शामिल ।
नक्सल संगठन का बड़ा खुलासा: 11 महीनों में 320 कैडर मारे जाने की स्वीकारोक्ति, 8 केंद्रीय समिति और 15 राज्य स्तर के नेता शामिल

जगदलपुर, 24 नवम्बर। देश में नक्सल गतिविधियों पर लगातार हो रहे प्रहार के बीच नक्सलियों की केंद्रीय समिति ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। संगठन द्वारा जारी 17 पेज की बुकलेट में पिछले 11 महीनों में कुल 320 नक्सल कैडर्स के मारे जाने की स्वीकृति दी गई है। इनमें 8 सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) और 15 स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) शामिल हैं, जिन्हें संगठन अपने शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा मानता है।
महासचिव बसवा राजू की मौत ‘सबसे बड़ा नुकसान’
बुकलेट में नक्सलियों ने स्वीकारा है कि पोलित ब्यूरो मेंबर और महासचिव बसवा राजू का एनकाउंटर संगठन के लिए “सबसे बड़ा झटका” है। संगठन ने 2 से 8 दिसंबर के बीच अपनी 25वीं वर्षगांठ मनाने की भी घोषणा की है।
राज्यों में हुए सबसे अधिक नुकसान
बुकलेट के अनुसार दिसंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच नक्सलियों को देशभर में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है:
- दंडकारण्य (दक्षिण बस्तर): 243 मौतें
- बिहार–झारखंड: 22
- ओडिशा: 33
- महाराष्ट्र–एमपी–छत्तीसगढ़ सीमा: 6
- तेलंगाना: 8
- आंध्र–ओडिशा बॉर्डर (AOB): 6
इन 320 में से 187 पुरुष और 117 महिलाएं शामिल हैं, जबकि 20 कैडरों की पहचान केंद्रीय समिति भी स्पष्ट नहीं कर पाई है।
नेताओं की श्रेणीवार मौतें
- 8 केंद्रीय समिति सदस्य (CCM)
- 15 राज्य समिति सदस्य (SCM)
- 25 जिला समिति स्तर
- 73 एरिया कमेटी सदस्य (ACM)
- 116 पार्टी सदस्य
- 13 पीएलजीए (PLGA) सदस्य
- 33 स्थानीय जन मिलिशिया सदस्य
- अन्य 37 की जानकारी उपलब्ध नहीं
भूपति और सतीश को बताया ‘गद्दार’
संगठन ने अपनी बुकलेट में भूपति और सतीश को गद्दार बताते हुए स्वीकारा कि उनके नेतृत्व में 299 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियां अपनी बड़ी सफलता मानती हैं।
सरकार का दावा: बस्तर तेजी से लौट रहा मुख्यधारा की ओर
बस्तर रेंज के आईजी सुन्दरराज पट्टलिंगम ने कहा कि सरकार “बस्तर के हर हिस्से में समावेशी विकास, स्थायी शांति और सार्थक प्रगति” के लिए प्रतिबद्ध है। हाल के महीनों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में नक्सली प्रभाव लगातार कमजोर हो रहा है।




