छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण में रचा इतिहास: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली में 12 जिलों को किया सम्मानित
“प्रदेश का जल भविष्य अब सुरक्षित दिशा में”—मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर,मोर माटी
छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राज्य के 12 जिलों को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान छत्तीसगढ़ को जल प्रबंधन के क्षेत्र में देशभर में अग्रणी पंक्ति में खड़ा करता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य के नागरिकों की जागरूकता, प्रशासनिक समर्पण और जल संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की मिसाल है। उन्होंने कहा कि “यह पुरस्कार प्रदेश के जल भविष्य को सुरक्षित करने वाली प्रेरणादायी उपलब्धि है।”
रायपुर चमका राष्ट्रीय मंच पर
- रायपुर नगर निगम देश में प्रथम स्थान
- जनभागीदारी से कुल 69,364 कार्यों का सफल निष्पादन
- पूर्वी जोन कैटेगरी में तीसरा स्थान
रायपुर जिले और नगर निगम ने मिलकर जल संचय को अभियान का स्वरूप दिया, जिसमें हजारों नागरिक सक्रिय तौर पर जुड़े।
राजनांदगांव—जोन में अव्वल
- ईस्ट जोन राष्ट्रीय जल अवॉर्ड में पहला स्थान
- जनभागीदारी कैटेगरी 01 में दूसरा स्थान
- 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि
- 58,967 जल संरचनाएँ तैयार
बालोद—प्रदेश की नई जल राजधानी
- कैटेगरी 01 में देश में पहला स्थान
- 2 करोड़ रुपये पुरस्कार
- रिकॉर्ड 92,742 जल संरचनाएँ
महासमुंद, बलौदाबाजार और गरियाबंद भी शीर्ष में
- महासमुंद – कैटेगरी 02 में प्रथम (35,182 संरचनाएँ)
- बलौदाबाजार-भाटापारा – कैटेगरी 02 दूसरा स्थान (30,927 संरचनाएँ)
- गरियाबंद – कैटेगरी 02 तीसरा स्थान, 1 करोड़ पुरस्कार (26,025 कार्य)
बिलासपुर और रायगढ़—शहरी प्रयासों की मिसाल
- बिलासपुर – कैटेगरी 03 में प्रथम, 25 लाख पुरस्कार (21,058 संरचनाएँ)
- रायगढ़ – कैटेगरी 03 में दूसरा स्थान (19,088 कार्य)
दुर्ग, बलरामपुर, धमतरी और सूरजपुर ने भी बढ़ाया मान
- दुर्ग – कैटेगरी 03, 16वां स्थान (5,010 कार्य)
- बलरामपुर – 6वां स्थान (8,644 परियोजनाएँ)
- धमतरी – 8वां स्थान (7,674 परियोजनाएँ)
- सूरजपुर – 12वां स्थान (5,797 कार्य)
संक्षेप में—छत्तीसगढ़ ने जल प्रबंधन में प्रस्तुत किया राष्ट्रीय मॉडल
अभियान ने न सिर्फ जल संचयन को जनआंदोलन बनाया, बल्कि पूरे देश के सामने यह उदाहरण रखा कि इच्छाशक्ति, जनभागीदारी और स्थानीय प्रशासनिक नेतृत्व से प्राकृतिक संसाधनों का भविष्य किस तरह सुरक्षित किया जा सकता है।




